Thursday, October 2, 2014
क्या आप गैस से परेशान हैं?
सुखी जीवन का राज स्वस्थ रहना है और यह तभी मुमकिन है जब पेट साफ रहे। लेकिन तनाव, सही डाइट न लेने, खराब रुटीन, नींद पूरी न होने की वजह से अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है। इससे शरीर में आलस रहता है और पेट व सिर में भी जोरों का दर्द होता है। इसके अलावा, और भी दूसरी बीमारियां शरीर में घर कर जाती हैं। कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कडा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। क्या आप गैस से परेशान हैं? पेट में गैस एवं खट्टी डकारें आम समस्या बन गई है। पेट की बीमारियों के अतिरिक्त गैस बनने की कई और भी स्थितियां हैं , जिनकी वजह से लोग परेशान रहते हैं। किन बीमारियों में गैस बनती हैं? पाचन तंत्र की कई पुरानी बीमा
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Sant Ayurvedic Aushdhayla
क्या आप गठिया रोग से पीडित हैं?आमवात जिसे गठिया भी कहा जाता है अत्यंत पीडादायक बीमारी है।अपक्व आहार रस याने “आम” वात के साथ संयोग करके गठिया रोग को उत्पन्न करता है।अत: इसे आमवात भी कहा जाता है। इसमें जोडों में दर्द होता है, शरीर मे यूरिक एसीड की मात्रा बढ जाती है। छोटे -बडे जोडों में सूजन का प्रकोप होता रहता है। यूरिक एसीड के कण(क्रिस्टल्स)घुटनों व अन्य जोडों में जमा हो जाते हैं।जोडों में दर्द के मारे रोगी का बुरा हाल रहता है।गठिया के पीछे यूरिक एसीड की जबर्दस्त भूमिका रहती है। इस रोग की सबसे बडी पहचान ये है कि रात को जोडों का दर्द बढता है और सुबह अकडन मेहसूस होती है। यदि शीघ्र ही उपचार कर नियंत्रण नहीं किया गया तो जोडों को स्थायी नुकसान हो सकता है। गठिया रोग या संधिवात में रोगी के गांठों में असह्य दर्द होता है। यह रोग पाचन क्रिया से संबंधित है। इसके संबंध खून में मूत्रीय अम्ल का अत्यधिक उच्च मात्रा में पाए जाने से होता है। इसके कारण जोड़ों (प्रायः पादागुष्ठ (ग्रेट टो)) में तथा कभी कभी गुर्दे में भी क्रिस्टल भारी मात्रा में बढ़ता है। गठिया का रोग मसालेदार भोजन और शराब पीने से संबद्ध ह
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क्या आप गठिया रोग से पीडित हैं?आमवात जिसे गठिया भी कहा जाता है अत्यंत पीडादायक बीमारी है।अपक्व आहार रस याने “आम” वात के साथ संयोग करके गठिया रोग को उत्पन्न करता है।अत: इसे आमवात भी कहा जाता है। इसमें जोडों में दर्द होता है, शरीर मे यूरिक एसीड की मात्रा बढ जाती है। छोटे -बडे जोडों में सूजन का प्रकोप होता रहता है। यूरिक एसीड के कण(क्रिस्टल्स)घुटनों व अन्य जोडों में जमा हो जाते हैं।जोडों में दर्द के मारे रोगी का बुरा हाल रहता है।गठिया के पीछे यूरिक एसीड की जबर्दस्त भूमिका रहती है। इस रोग की सबसे बडी पहचान ये है कि रात को जोडों का दर्द बढता है और सुबह अकडन मेहसूस होती है। यदि शीघ्र ही उपचार कर नियंत्रण नहीं किया गया तो जोडों को स्थायी नुकसान हो सकता है। गठिया रोग या संधिवात में रोगी के गांठों में असह्य दर्द होता है। यह रोग पाचन क्रिया से संबंधित है। इसके संबंध खून में मूत्रीय अम्ल का अत्यधिक उच्च मात्रा में पाए जाने से होता है। इसके कारण जोड़ों (प्रायः पादागुष्ठ (ग्रेट टो)) में तथा कभी कभी गुर्दे में भी क्रिस्टल भारी मात्रा में बढ़ता है। गठिया का रोग मसालेदार भोजन और शराब पीने से संबद्ध ह
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Wednesday, October 1, 2014
संत आयुर्वेदिक औषधालय
संत आयुर्वेदिक औषधालय की स्थापना सन 1935 में स्वर्गीय वैदराज कल्याण सिंह राठौर ने थी । आपने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की । इसके बाद आपने लखनऊ से B.U.M.S. की पढाई पूरी की । 30 वर्ष की आयु में आपने सहारनपुर में आपने संत आयुर्वेदिक औषधालय की स्थापना की । आप आयुर्वेद एवं प्राकर्तिक चिकित्सा में अत्यन्त माहिर थे । आपने अपने जीवन काल में कहीं दुर्लभ योगों (दवाईयों ) का निर्माण किया, जिनमे अतुल शक्ति पावर कैप्सूल, अमर कल्याण वटी, आनंद प्रभा वटी, पयोरिआ(दांत में कीड़ा लगना, बदबू आना, दर्द होना एवं खून आना इत्यादि), विगोटेक्स, जाफरानी हर्बल कल्याण तेल, माधुरी हर्बल केश तेल व पाउडर एवं सूरमा नूरे नज़र आदि प्रमुख हैं । आपका देहांत सन 1987 में हो गया था ।
आपके पुत्र जसवंत सिंह राठौर हैं जो वर्तमान में संत आयुर्वेदिक फार्मेसी का कार्यभार सम्भाल रहे हैं । आप भी अपने पिता की भांति एक सुलझे हुए आयुर्वेद शास्त्री हैं । आपने लखनऊ से B.U.M.S की डिग्री प्राप्त की । शिक्षा पूरी करने के बाद आपने अपने पिता कल्याण सिंह राठौर के सानिंध्य में लगभग 25 वर्षों तक कार्य किया एवं उनके अनुभव को आत्मसात किया । आपका जन्म सन 1938 में हुआ था। वर्तमान में आपकी आयु 76 वर्ष है और आपको लगभग 50 वर्षों का अनुभव है जो आपकी विद्व्ता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
आपके बड़े पुत्र वैद गुरमीत सिंह राठौर हैं जो पिछले 16 वर्षों से आपके साथ चिकित्सा कार्य कर रहे हैं । आप पटना से वैद विशारद हैं एवं आयुर्वेद में अच्छा खासा अनुभव रखते हैं । आप प्राचीन खानदानी नुस्खों के द्वारा दुर्लभ एवं असाध्य रोगों का उपचार कर रहें हैं ।
निःशुल्क परामर्श
आप कभी भी प्रातः 10:30 बजे से शाम 7 बजे के बीच ( दोपहर 2 से 4 को छोड़कर) वैद जसवंत सिंह जी से मोबाइल नंबर 8057435804, 7409224797 पर निःशुल्क परामर्श ले सकते हैं ।
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